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Netmeds जैसी कंपनियों को खरीदने के बाद Reliance का अब Amazon और Flipkart से सीधा मुकाबला

Last Updated On : 19 Aug 2020

नई दिल्ली। रिलायंस इंडस्ट्रीज ( Reliance Industries ) के रिटेल सेक्टर ( Retail Sector ) खासकर ई-रिटेल सेक्टर में एंट्री करने से सबसे ज्यादा खतरे की घंटी अमेजन ( Amazon India ) और फ्लिकार्ट ( Flipkart ) के लिए बज गई है। नेटमेड्स ( RRVL Buy Netmeds ) को खरीदना इसका ताजा उदाहरण है। वहीं जियोमार्ट ( Reliance Jiomart ) के तहत कंपनी अभी कई और कंपनियों के साथ डील फाइनलाइज करने में जुटी हुई है। अगर रिलायंस फ्यूचर ग्रुप की डील ( Reliance Future Group Deal ) हो जाती है तो अमेजन और फ्लिपकार्ट को पीछे छोडऩे में रिलायंस को काफी आसानी हो जाएगी। फ्लिपकार्ट को दुनिया की सबसे बड़ी रिटेल कंपनियों में से एक वॉलमार्ट का सपोर्ट है। वहीं अमेजन दुनिया दुनिया के सबसे अमीर शख्स जेफ बेजोस की कंपनी है। ऐसे में रिलायंस के लिए दोनों कंपनियों से फाइट करना आसान नहीं होगा। क्यों रिलायंस जियो के सामने एयरटेल, आइडिया और वोडाफोन जैसी कंपनियां सामने थी, इस बार मुकाबला रिटेल सेक्टर के ग्लोबल लीडर्स के साथ मुकाबला है।

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ई-रिटेल या कॉमर्स में किसकी कितनी साझेदारी
मीडिया रिपोर्ट की मानें तो देश में ई-कॉमर्स सेक्टर या ई-रिटेल में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी फ्लिपकार्ट की है। उसका मार्केट शेयर 60 फीसदी के आसपास है। जबकि अमेजन की हिस्सेदारी 30 फीसदी के आसपास है। अब आप समझ सकते हैं कि जियोमार्ट का मुकाबला किन दिग्गज कंपनियों के साथ होने वाला है। 2019 में सितंबर से लेकर 4 अक्टूबर तक 3 बिलियन का ग्रॉस मरचेंडाइज वैल्यू 3 बिलियन डॉलर यानी 19 हजार करोड़ रुपए आंका गया था। जबकि ओवरऑल कारोबार 4.8 बिलियन डॉलर यानी 35 हजार करोड़ रुपए के आसपास आंका गया था। ऐसे में 2020 और आने वाले सालों में इसके और ज्यादा बढऩे के चांस हैं।

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रिलायंस रिटेल की एंट्री से लगेगा झटका
अगर बात रिलायंस रिटेल की करें तो देशभर के 6600 से ज्यादा सिटी में इसके 10,415 स्टोर्स हैं। जिनमें 500 मिलियन सालाना फुटफॉल है। वहीं दूसरी ओर रिलायंस रिटेल फूड और ग्रोसरी के लिए नया एप लांच कर चुका है। जिसकी बीटा टेस्टिंग हो चुकी है। इंडिया ब्रांड इक्विटी फाउंडेशन की मानें तो 4 जी और उसके बाद 5 जी स्मार्टफोन आने से कंज्यूमर की संख्या में इजाफा होने के आसार है। 2026 तक इंडिया का ई-कॉमर्स मार्केट 200 बिलियन डॉलर होने के आसार हैं। वहीं जैसे जैसे इंडिया में सभी चीजों का डिजिटल ट्रांसफोर्मेशन देखने को मिल रहा है, 2021 तक देश में इंटरनेट यूजर 829 मिलियन तक बढ़ सकता है।

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ई-कॉमर्स पॉलिसी भी देगी झटका
खास बात तो ये है कि देश में नई ई-कॉमर्स पॉलिसी भी लागू हो गई है। ऐसे में अमेजन और फ्लिपकार्ट को नई पॉलिसी के अनुरूप ढालने में थोड़ा वक्त लगेगा। जबकि जियोमार्ट और रिलायंस रिटेल मार्केट पहले दिन से ही उसी पॉलिसी पर काम करेगा। जिससे उसे कोई परेशानी नहीं होगी। वहीं ग्रोफर्स, बिगबास्केट, बाकी ग्रोसरी कंपनियों की मौजूदगी से आने वाले समय में दोनों कंपनियों पर असर पडऩे के आसार हैं।

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रिलायंस कर रहा था डील
आरआईएल रिटेल सेक्टर में अपनी पकड़ को मजबूत करने के लिए कई कंपनियों का अधिग्रहण करने का मन भी बना रही है। जानकारों की मानें तो फर्नीचर आउटलेट अर्बन लैडर, लांजरी ब्रांड जिवामे में हिस्सेदारी खरीदने की योजना पर काम चल रहा है। खबरों के अनुसार, रिलायंस जिवामे के लिए 16 करोड़ डॉलर का भुगतान कर सकती है, जबकि अर्बन लैडर सौदा तीन करोड़ डॉलर में हो सकता है। इसके अलावा चर्चा है कि रिलायंस दूध डिलीवरी कंपनी मिल्कबॉस्केट को भी खरीद सकती है।

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फ्यूचर ग्रुप के साथ हो सकती है सबसे बड़ी डील
अमेजन और फ्लिपकार्ट दोनों ही कंपनियों की नजरें रिलायंस और फ्यूचर ग्रुप डील पर भी होंगी। जानकारों की मानें तो आरआईएल किशोर बियानी के फ्यूचर ग्रुप की रिटेल संपत्तियों के पूर्ण या कुछ हिस्सों का अधिग्रहण करने की भी तैयारी में है। यह डील करीब 23 हजार करोड़ रुपए की हो सकती है। दोनों कंपनियों के बीच आखिरी दौर की बातचीत चल रही है। जानकरों की मानें तो जल्द ही दोनों कंपनियों के बीच डील फाइनल हो सकती है। अगर दोनों के बीच डील फाइनल हो जाती है तो अमेजन और फ्लिपकार्ट दोनों के लिए भारत में बड़ी मुसीबत खड़ी हो जाएगी। क्योंकि तब मुकेश अंबानी देश के सबसे बड़े रिटेल कारोबारी बन जाएंगे।

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