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लकवे में मालिश नहीं, फिजियोथेरेपी जरूरी

Last Updated On : 25 Jun 2019

हार्ट अटैक की तरह ब्रेन स्ट्रोक भी इमरजेंसी की स्थिति है। इसे ब्रेन अटैक भी कहते हैं। दिमाग में रक्त आपूर्ति करने वाली किसी नली में अचानक रक्त का थक्का जमने या ब्लॉक होने से रक्त प्रवाह बाधित होता है व दिमाग अपना काम ठीक से नहीं करता। यह स्थिति ब्रेन स्ट्रोक कहलाती है। चूंकि दिमाग से ही शरीर की क्रियाएं नियंत्रित होती हैं इसलिए इसमें परेशानी आने पर लकवे की समस्या सामने आती है।

कुछ लोग मानते हैं कि लकवे वाले हिस्से की मालिश करने से मरीज जल्दी ठीक होता है, यह सिर्फ भ्रम है। यह दिमागी परेशानी है इसलिए इलाज के दौरान जैसे-जैसे ब्रेन की रिकवरी होगी, स्थिति में वैसे ही सुधार होगा। जल्दी ठीक होने के लिए मालिश करने की बजाय फिजियोथैरेपी की मदद लें। साथ ही डॉक्टर द्वारा बताई दवाओं को भी नियमित लें। इसके अलावा तंंबाकू, शराब व धूम्रपान आदि से परहेज करें।

20 फीसदी मामलों में होता है हेमरेज
ब्रेन हेमरेज ब्रेन स्ट्रोक का ही हिस्सा है लेकिन स्ट्रोक के सभी मामलों में हेमरेज होना जरूरी नहीं है। जब दिमाग की कोई रक्त नलिका फट जाती है तो इसे ब्रेन हेमरेज कहा जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक स्ट्रोक के करीब 80 प्रतिशत मामले क्लॉटिंग व ब्लॉकेज के होते हैं, 20 फीसदी हेमरेज के। हेमरेज में ज्यादातर मरीज कोमा में चले जाते हैं।

नली की लोकेशन पर निर्भर लकवे की स्थिति
दिमाग के दाएं हिस्से से हमारे शरीर का बायां भाग नियंत्रित होता है और बाएं हिस्से से दायां भाग। यदि ब्रेन के दाएं हिस्से की नली ब्लॉक होगी तो लकवा शरीर के बाएं हिस्से में होगा और यदि ब्लॉकेज दाएं हिस्से में होगा तो लकवा बाएं हिस्से में होगा।

तुरंत इलाज से जल्दी रिकवरी
इलाज मरीज की स्थिति व जरूरत के हिसाब से अलग-अलग दवाओं से होता है। मरीज को जितनी जल्दी इलाज मिलेगा उतनी जल्दी रिकवरी होती है। कुछ दवाएं शुरू के साढ़े चार घंटों में ही असर करती हैं। इसलिए मरीज को फौरन अस्पताल ले जाने से स्थिति को काबू कर सकते हैं।

ध्यान रखें :
मरीज के ठीक होने की गुंजाइश खासकर इस बात पर निर्भर करती है कि इलाज स्ट्रोक आने के कितनी देर बाद शुरू हुआ। याद रखें कि यदि व्यक्ति बेहोश हो गया है तो उस दौरान उसे कुछ भी खिलाने-पिलाने की कोशिश न करें।

प्रमख जांचें :
स्ट्रोक से दिमाग का कितना हिस्सा प्रभावित हुआ है यह जानने के लिए सीटी स्कैन, एमआरआई व एंजियोग्राफी आदि करते हैं। सामान्य जांचों के रूप में बीपी व डायबिटीज से जुड़े टैस्ट कराए जाते हैं।

कारण :
हृदय संबंधी बीमारी, हाई बीपी, मोटापा, कोलेस्ट्रॉल व डायबिटीज, धूम्रपान, तंबाकू व शराब आदि प्रमुख कारण हैं।

Published From : Patrika.com RSS Feed

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