Home / Latest Alerts / शरीर की इन समस्याओं के लिए करें गर्म और ठंडा सेंक, जानें इसके बारे में

शरीर की इन समस्याओं के लिए करें गर्म और ठंडा सेंक, जानें इसके बारे में

Last Updated On : 12 Jan 2019

चोट या जोड़ों के दर्द में राहत के लिए ठंडा या गर्म सेंक करना आसान उपाय माना जाता है। लेकिन यह जानना भी जरूरी है कि कब और किस दर्द में कौनसा सेंक करना चाहिए। आइये जानते हैं इसके बारे में

आर्थराइटिस - घुटनों, कंधों, कोहनी व अंगुलियों के जोड़ों में ऊत्तकों का घिस जाना।
यह करें - गर्म पानी से सेंक करने पर जोड़ों व मांसपेशियों की अकड़न दूर होती है।

गाउट फ्लेयर अप - बॉडी में यूरिक एसिड की मात्रा बढ़ने से पैर के अंगूठे, कोहनी व एडी में अचानक दर्द उठना।
बर्फ से सेंक करने पर अचानक उठे दर्द से छुटकारा पाया जा सकता है।

सिर दर्द - तंत्रिकाओं व रक्त वाहिकाओं से सिर दर्द या मांसपेशियों में खिंचाव से गले में दर्द।
बर्फ से सेंक करने से सिरदर्द में राहत मिलती है और गर्म पानी के सेंक से गले के दर्द में आराम।

मोच आना - मांसपेशियों के खिंचने से शरीर के किसी भी भाग में खून इकट्ठा होने की स्थिति या लील पड़ जाना।
चोट पर बर्फ का सेंक करने से जलन दूर होती है और गर्म पानी से सेंक करने पर जकड़न खत्म होती है।

खिंचाव आना - एड़ी, घुटने, पांव, कोहनी आदि के जोड़ों मे लिगामेंट के फट जाने पर खिंचाव आ जाने से दर्द होना।
शुरू में ठंडे सेंक से दर्द के कारण हो रही जलन दूर होती है, बाद में गर्म सेंक करने पर मांसपेशियों की अकड़न।

टेन्डीनिटिस -
पैरों व हाथों की अंगुलियों के छोटे जोड़ों में स्थित नसों (टेंडन्स) की झिल्ली में सूजन आ जाने से दर्द होना।
इस स्थिति में ठंडा सेंक करने से बर्फ पहले जलन कम होती है और बाद में दर्द से भी राहत मिलती है।

टेन्डिनोसिस -
घर्षण के कारण एड़ी के पास टखने के जोड़ों की पेशियों में दर्द व अकडऩ।
जब जलन खत्म हो जाए तो गर्म सेंक करना चाहिए जिससे अकड़न दूर होती है।

ठंडा सेंक क्योंं?
बर्फ हमारे शरीर की रक्त वाहिकाओं को सिकोड़ देती है। जिससे हमें दर्द व जलन से हमें छुटकारा मिलने के साथ ही चोट ठीक हो जाती है।

गर्म सेंक क्यों?
गर्मी से नसों में रक्त प्रवाह तेज हो जाता है जिससे अकड़ी हुई मांसपेशियां ढीली होने लगती हैं और दर्द में आराम मिलता है।

सावधानी -
गंभीर चोटों में गर्म सेंक न लें। यह चोट में हो रही जलन को और बढ़ा सकता है। ऐसे में उस चोट को ठीक होने में ज्यादा समय भी लग सकता है

चोट के 6-7 घंटे बाद ठंडे सेंक से बचें -
गर्म पानी का सेंक बहुत अधिक सर्दी के मौसम में करना फायदेमंद होता है। गर्मी के मौसम में गर्म सेंक नहीं करना चाहिए। सर्दी के मौसम में जोड़ों पर स्थित नसें सिकुडऩे लगती हैं। ऐसे में गर्म पानी के सेंक से दर्द पैदा करने वाले ऊत्तक और नसें खुल जाती हैं। ठंडा सेंक केवल ताजा चोट के समय ही करना चाहिए। यदि चोट लगे 6-7 घंटे हो चुके हैं तो ठंडे सेंक से बचना चाहिए। नील पड़ने से रोकने व जोड़ों में खून को इकट्ठा होने से रोकने के लिए ठंडा सेंक किया जाता है।

Published From : Patrika.com RSS Feed

comments powered by Disqus

Search Latest News

Top News