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मसूढ़े खिसकने पर टिश्यू ग्राफ्टिंग से करते हैं इलाज

Last Updated On : 22 Jul 2019

आकर्षक दिखने व दांतों की सेहत के प्रति सजग लोग अक्सर कई तरह की डेंटल सर्जरी अपनाते हैं। इसमें से एक है सबइपिथेलियल कनेक्टिव टिश्यू ग्राफ्ट, जिसे दांतों को सपोर्ट देने वाले मसूढ़ों को लेवल में रखने के लिए प्रयोग करते हैं। डेंटल में यह एक नई तकनीक है जिसे मेडिकली एक कॉस्मेटिक प्लास्टिक सर्जरी भी कहते हैं।

क्या है तकनीक -
मसूढ़ा यदि नीचे धंसने लगे व जब दांत की जड़ का हिस्सा तक दिखने लगे तो कनेक्टिव टिश्यू ग्राफ्टिंग करते हैं। इस प्रक्रिया में मुंह के तालू पर एक बेहद छोटा चीरा लगाकर अंदर की कोशिका सहित त्वचा जिसे सबइपिथेलियल कनेक्टिव टिश्यू कहते हैं को बाहर निकाल लेते हैं व उस जगह पर पेरियोपैक (ड्रेसिंग के लिए प्रयोग में लिया जाने वाला मेडिकेटेड मिश्रण) से ड्रेसिंग कर देते हैं। जो खुद ब खुद हट जाती है। बाहर निकाली गई कोशिका सहित त्वचा को दांत के उस हिस्से पर टांकें लगाकर जोड़ देते हैं जहां का मसूढ़ा बेहद नीचे धंस गया हो। इन टांकों पर पेरियोपैक लगा देते हैं। जिस दांत के मसूढ़े पर ग्राफ्ट बनाते हैं उसके आकार या स्थिति के अनुसार ही तालू में से कोशिका निकालते हैं।

इन वजहों से खिसकते मसूढ़े -
मसूढ़ों के अपनी जगह से नीचे खिसकने के ज्यादातर मामले ब्रश करने के गलत तरीके के अलावा मसूढ़ों पर ब्रश से अधिक दबाव बनाने के होते हैं। इसके अलावा खाना चबाने का तरीका और दांतों की बनावट भी इसकी वजह हैं। निचले जबड़े के दांतों के मसूढ़ों खासकर सामने वालों में यह दिक्कत ज्यादा होती है।

रिकवरी, सावधानी -
सर्जरी के बाद रक्तस्त्राव बंद हो जाए इसके लिए मरीज को पहले 24 घंटे तक हल्का व ठंडा भोजन करने और बर्फ से सिकाई करने की सलाह दी जाती है। इस दौरान उसे ठोस चीजें खाने की मनाही होती है। 10 दिन बाद ग्राफ्टिंग वाली जगह के टांकों को खोल दिया जाता है।

Published From : Patrika.com RSS Feed

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