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भारतीय दवा कंपनियों की सेहत खराब कर रहे अमरीका में बढ़ते मुकदमें

Last Updated On : 19 Apr 2019

नई दिल्ली। अमरीका में भारतीय दवा कंपनियों पर मुकदमे और दवा पर प्रतिबंध जैसी कार्रवाइयां लंबे अर्से से होती रही हैं, पर हाल के दिनों में इनपर तरह-तरह के मुकदमों की बाढ़ सी आ गई है। इस वजह से भारतीय दवा कंपनियों मेंं अब अमरीका में निवेश पर जोखिम बढऩे का डर पैदा हो रहा है। यह बात एक शोध अध्ययन में सामने आई है।

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18 जेनरिक फार्मा कंपनियों पर मुकदमा
ग्लोबल इन्वेस्टमेंट रिसर्च नेटवर्क स्मार्टकर्मा की एक रिपोर्ट के मुताबिक अमरीका में इस समय दवा की कीमतों को लेकर 18 जेनरिक फार्मा कंपनियों पर मुकदमा (क्लास सूट) चल रहा है। इनमें पांच भारतीय दवा कंपनियां अरबिंदो फार्मा, डॉक्टर रेड्डी लैब, ऐम्क्योर, ग्लेनमार्क और जायडस शामिल हैं। जेनरिक दवाओं की कीमतों पर साठगांठ को लेकर इनपर अमरीका में अब तक का सबसे बड़ा मुकदमा चल है। यह कानूनी लड़ाई वॉशिंगटन डीसी तक न रहकर अब 50 राज्यों तक फैल गई है।

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41,622 करोड़ रुपए के पार जा सकती है देनदारी
रिपोर्ट के मुताबिक अभी डॉक्टर रेड्डी लैब्स, अरबिंदो फार्मा, कैडिला हेल्थकेयर और ग्लेनमार्क अमरीकी बाजार में ऊंचे जोखिम पर हैं। ऐसा पता चला है कि इन कंपनियों की कुल देनदारी ४१,६२२ करोड़ रुपए (6 बिलियन डॉलर) के पार जा सकती है और यह अब तक सबसे बड़ा ऑन रेकॉर्ड समझौता होगा। रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय दवा कंपनियां विभिन्न मुकदमों में पहले ही करीब 3600 करोड़ रुपए खर्च कर चुकी हैं।

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क्या है 'क्लास-एक्शन' मामला
जेनरिक दवाओं की कीमतों में हुई वृद्धि के चलते राज्य सरकार ने फार्मा कंपनियों के खिलाफ जांच के बाद एंट्री-ट्रस्ट के अलावा मरीजों के समूहों द्वारा 'क्लास-एक्शनÓ मुकदमा दायर किया गया है। अपनी विसल ब्लोअर नीति के जरिए यूएसएफडीए ने इन दवा कंपनियों के कर्मचारियों को उचित भत्ते देने को भी कंपनियों से कहा है। मुकदमों का फैसला प्रतिकूल होने पर कंपनियों को बहुत भारी-भरकम रकम की अदायगी करनी पड़ सकती है।

 

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