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तकनीक जो जांच के दौरान होने वाले दर्द का स्तर बताएगी

Last Updated On : 04 Jan 2019

मौहम सिद्दीकी भारतीय मूल की 17 वर्षीय अमरीकी नागरिक हैं। हाल ही कॉरनेल यूनिवर्सिटी की ओर से आयोजित ‘डिजिटल ट्रांसफॉरमेशन हैकाथॉन’ अपने नाम कर देश का गौरव बढ़ाया है। बारहवीं कक्षा की छात्रा हैं और न्यूयॉर्क के वेस्टल स्कूल में पढ़ाई करती हैं। ये ऐसी पहली छात्रा हैं जिसने स्नातक की पढ़ाई पूरी किए बिना ही डिजिटल ट्रांसफॉरमेशन हैकाथॉन प्रतियोगिता को अपने नाम किया है। इनकी बनाई ‘पेन डिटेक्टिंग डिवाइस’ की मदद से अब डॉक्टर ये पता कर सकेंगे की जांच के दौरान मरीज को कितना दर्द हो रहा है। इस आधार पर जांच के तौर-तरीकों में बदलाव किया जा सकता है।

इनका मानना है कि इस तकनीक का फायदा उन लोगों को ज्यादा होगा जो जांच के दौरान होने वाली गंभीर परेशानियों की वजह से जांच नहीं करा पाते हैं या उन्हें अधिक दर्द से गुजरना पड़ता है। ऐसे मरीजों के लिए ये तकनीक मददगार होगी जिससे उनका इलाज बाधित नहीं होगा। अवॉर्ड जीतने के बाद माइक्रोसॉफ्ट के साथ इनकी बात चल रही है जिससे इनकी डिवाइस को और बेहतर बनाया जा सके और इलसज में इसका इस्तेमाल हो सके।
दिमाग की तरंगों को पकड़ेगी इनकी डिवाइस
पेन डिटेक्टिंग डिवाइस ईसीजी की तरह काम करेगी जिसमें जांच के दौरान मरीज के सिर और सीने पर चिप लगाई जाएगी। जैसे ही जांच की प्रक्रिया शुरू होगी दिमाग और दिल में होने वाला बदलाव डिवाइस की स्क्रीन पर दिखने लगेगा। इसके बाद चिकित्सक मरीज की परेशानी और रिपोर्ट देखते हुए जांच की प्रक्रिया को सरल बनाने की कोशिश करेंगे।

इलाज आसान बनाना लक्ष्य
इनका सपना स्वास्थ्य से जुड़ी ऐसी डिवाइस तैयार करना है जिससे रोगियों और डॉक्टरों की परेशानी को कम किया जा सके। इन्हें पढ़ाई के साथ खेलना, किताबें पढऩा और तकनीक से जुड़ी बातों को जानने समझने में अधिक दिलचस्पी है। महीने में एक बार साइंस क्लब जरूर जाती हैं जहां देश-दुनिया में विज्ञान के क्षेत्र में हो रही हलचल के बारे में विस्तार से जानती और समझती हैं। कई साइंस कंप्टीशन में अवॉर्ड और मेडल भी जीत चुकी हैं।

Published From : Patrika.com RSS Feed

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